Inspirational Story in Hindi On Time Management

समय-प्रबंधन प्रेरणादायक कहानी

Inspirational Story in hindi On Time Management 

 

Inspirational Story In Hindi

 

दोस्तों समय-प्रबंधन या Time Management हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मैं आशा करता हूँ कि mannkvichar के इस Motivational Article “Inspirational Story In Hindi On Time Management ” से आपको एक नयी दिशा मिलेगी |

“खोया हुआ धन कड़ी मेहनत से हासिल किया जा सकता है, खोया ज्ञान अध्ययन से प्राप्त किया जा सकता है, खोया हुआ स्वास्थ्य दवाइयों और संयम से प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन खोया हुआ समय सदा के लिये चला जाता है “

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Inspirational Story In Hindi

 

ये कहानी यूनान देश के एक मूर्तिकार की है | कहा जाता था की उसकी बनायी मूर्तियाँ इतनी जीवंत होती थी कि अक्सर उनके प्राणवान होने का संदेह पैदा हो जाता था |

एक बार यूनान में एक बहुत बड़ी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया |

उस प्रदर्शनी में उस मूर्तिकार ने भी अपनी बनायी हुयी बहुत सी मूर्तियों का प्रदर्शन किया |

वैसे तो सभी मूर्तियाँ बहुत ही अच्छी थी पर एक मूर्ति अद्भुत और विशेष थी |

वह मूर्ति सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही थी |

उस मूर्ति की सुंदरता किसी देवी-देवता के सौन्दर्य को भी मात दे रही थी, क्योंकि उस मूर्ति में जीवन की सच्चाई साफ दिखाई दे रही थी |

ऐसा लग रहा था मानों जैसे वह मूर्ति कुछ कहना चाहती हो |

उस मूर्ति में कुछ अद्भुत विशेषताएँ थी | जैसे जहाँ इसके सिर के अगले हिस्से पर बाल थे,

तो वहीं इस मूर्ति का पिछला हिस्सा बिल्कुल गंजा था |

सिर के बाल ऐसे लग रहे थे मानों हवा में लहरा रहे हों |

जुल्फें कहीं ऊँची थीं और कहीं नीचे | उसके पाँव में पंख लगे थे और वह अपने पैरों की उँगलियों के सहारे खड़ी थी

उसके हाथ में एक उस्तरा था और मुख पर एक रहस्यमयी मुस्कान |

 

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सभी लोग मूर्ति को एकटक निहारते और मूर्तिकार की अद्भुत कलाकारी की खूब तारीफ़ करते |

तभी एक युवक वहाँ आया और मूर्ति को बहुत गौर से देखने लगा |

उसके मन में इस मूर्ति के बारे में और अधिक जानने की जिज्ञासा हुई |

उसने मूर्तिकार से पूछा, “यह मूर्ति किसकी है,?”

मूर्तिकार ने युवक की ओर मुस्कुराते हुए देखा और धीमे स्वर में कहा, “यह समय है?”

युवक समय की इस मूर्ति को देख कर आश्चर्यचकित रह गया |

उसने कलाकार से कहा, “यदि यह समय है तो आप मुझे ये बताइये की इसके सिर पर जो बाल हैं वे क्या संदेश देते हैं?”

मूर्तिकार ने उत्तर दिया, “सिर के आगे के भाग पर जो बाल हैं,

वे संदेश देते हैं कि यदि आप समय को पकड़ना चाहते हैं तो उसके माथे पर लहराती लटों से ही उसे पकड़िये अर्थात केवल वर्तमान ही तुम्हारे हाथों में है |

युवक यह जवाब सुन कर बहुत खुश हुआ |

उसे सोचा की इस रहस्यमयी मूर्ति में और भी बहुत से अद्भुत संदेश छुपे हुए हैं |

उस युवक ने फ़िर से मूर्तिकार से प्रश्न किया,”अच्छा मित्र यह बताओ

कि तुमने समय का मुख इतना सुंदर क्यों बनाया है?”

मूर्तिकार ने उत्तर दिया, “क्योंकि जीवन के फूल समय के बसंत में ही खिलते हैं |

अगर आज हम अपने वक़्त को सही तरीके से इस्तेमाल कर लेंगे तो कल की हमारी ज़िंदगी भी इसके सौन्दर्य की तरह खूबसूरत हो जायेगी |

इसके गालों में मौसम की लालसा है |

इसके मुख पर चमकता सौंदर्य जीवन के खुशनुमा पलों की उम्मीद है |

युवक पुनः मूर्तिकार से कहता है, “इसके पैरों में पंख क्यों लगे हैं और यह अपने पाँवों की उँगलियों पर ऐसे क्यों खड़ा है?”

 

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मूर्तिकार ने कहा,”ये पंख कोई साधारण पंख नहीं हैं, बल्कि समय की तेज़ रफ्तार की, उसकी ऊँची उड़ान की पहचान है |

ये पंख हमें बताते हैं कि समय दूसरी किसी चीज़ से अधिक तेज़ चलता है |

यह हवा के साथ उड़ता है और यदि उचित अवसर पर इसे पकड़ा ना जाए तो यह फ़िर बहुत दूर चला जाता है |

लेकिन यदि कोई व्यक्ति समय के साथ-साथ आगे बढ़ता है तो यह व्यक्ति को जीवन में बहुत ऊँचाइयों पर ले जाता है और हर सपने को साकार करता है |

यह अपने पाँवों की उँगलियों पर इसलिए खड़ा है क्योंकि यह हमेशा उड़ने को तैयार रहता है | यह स्वयं को हर समय गति में रखता है |

“अच्छा मित्र! यह बताओ कि इसके हाथों में उस्तरा क्यों है?” युवक ने फ़िर प्रश्न किया |

मूर्तिकार ने कहा,”क्योंकि समय किसी तलवार की धार से भी ज्यादा तेज़ है |

युवक मूर्तिकार के द्वारा दिए गये सभी जवाबों से संतुष्ट था….

 

युवक ने मूर्तिकार से कहता है- मित्र क्या खूब विशेषताएँ बताई तुमने समय की |

मुझे तो ऐसा लगता है कि केवल तुमने ही समय को सही मायनों में समझा है और आज तुम्हारे कारण ही मैं भी इसे समझ पाया हूँ |

 

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फिर भी यह एक सवाल बार-बार मेरे मन में उठता है कि आखिर समय पीछे से गंजा क्यों है?

मूर्तिकार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,”वह इसलिये क्योंकि यदि समय एक बार अपने पंखों वाले पाँव से उड़ जाता है,तो फ़िर कोई उसे पकड़ नहीं सकता |

उसे रोक सकना असंभव है |

यदि समय को काबू में करना चाहते हो,तो उसे उसके आगे के बालों से पकड़ो |

 

अर्थात वर्तमान का सदुपयोग करो और फ़िर तुम ज़िंदगी में वो सब हासिल कर पाओगे जो तुम पाना चाहते हो |

पर यदि समय को कभी पीछे से पकड़ने की कोशिश करोगे,

तो कभी उसे छू भी नहीं पाओगे और जीवन में खाली हाथ ही रह जाओगे |

जिन्हें अपनी मंज़िल पाने की लालसा है,उन्हें समय के साथ-साथ कदम मिलाकर ही आगे बढ़ना पड़ेगा |

तो दोस्तों हमे उम्मीद है आप को ये कहानी जरुर पसंद आई होगी |

 

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